• Latest Post

    भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा कैंसर रोधी गुणों वाला पौधा

    भारतीय वैज्ञानिकों के दल ने पश्चिमी घाट में एक दुर्लभ प्रजाति के पौधे की खोज की है, जो कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज में संभावनाओं के नए द्वार खोल सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस पौधे का वानस्पतिक नाम 'मिक्वेलिए डेंटते बड्ड' है, जो एक छोटी लता झाड़ी है और कैंसर रोधी एल्केलॉइड 'कैंपटोथेसिन' (सीपीटी) उत्पन्न करता है। यह कर्नाटक के कोदागु में मेदिकेरी जंगल में कहीं-कहीं पाया जाता है। बेंगलुरू के अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एन्वायरमेंट तथा बेंगलुरू व धारवाड़ के युनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के वैज्ञानिकों के दल ने इस दुर्लभ पौधे की खोज की है और अब वे इसकी व्यावसायिक तौर पर खेती के लिए काम कर रहे हैं। अध्ययन के एक प्रमुख लेखक जी.रविकांत ने कहा, "फॉरेस्ट्री कॉलेज सिरसी तथा युनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज बेंगलुरू के सहयोग से खेतों के कुछ मालिकों के साथ हम इस संबंध में कुछ प्रयोग कर रहे हैं।" बेंगलुरू के अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एन्वयारमेंट के तहत सूरी सहगल सेंटर फॉर बायोडाइवर्सिटीएंड कॉन्जर्वेशन में शोधकर्ता रविकांत ने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती इस पौधे को व्यापक स्तर पर उगाना है।" उल्लेखनीय है कि कैंपटोथेसीन एक महत्वपूर्ण कैंसर रोधी यौगिक है, जो एस्टेरीड क्लेड की विभिन्न प्रजातियों के पौधों से प्राप्त किया जाता है। सीपीटी से कई अर्ध कृत्रिम दवाएं जैसे हाइकैंपटिन (टोपोटिकैन) तथा कैंपटोस्टार (ईरिनोटिकैन या सीपीटी11) प्राप्त किया गया है, जिसका इस्तेमाल अंडाशय तथा फेफड़े के कैंसर के इलाज में किया जा रहा है।

    No comments