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    क्या है प्रधानमंत्री कार्यालय की इंटरनेट स्पीड?

    देश में औसतन 2एमबीपीएस की गति वाला इंटरनेट कनेक्शन आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध है। लेकिन सूचना तकनीक के मुरीद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ्तर यानी पीएमओ में यह गति 34एमबीपीएस (मेगाबाइट प्रति सेकंड) है।ऑनलाइनआरटीआई डॉट कॉम के सह-संस्थापक विनोद रंगनाथन ने एक आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी पीएमओ से मांगी थी। पीएमओ ने जवाब में कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा कार्यालय को 34एमबीपीएस स्पीड वाला इंटरनेट कनेक्शन दिया गया है।रंगनाथन ने बताया कि गूगल फाइबर सेवा, अमेरिका में आम नागरिकों को भी 1जीबीपीएस स्पीड का इंटरनेट कनेक्शन दिया जाता है।
    ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री के पास 34एमबीपीएस की स्पीड का कनेकशन होने में कोई गलत बात नहीं है। बल्कि देश का प्रधानमंत्री होने के नाते उनके पास बेहतर स्पीड होना आवश्यक भी है।हालांकि कोच्चि के एक गांव में आम लोगों के लिए भी 1जीबीपीएस स्पीड का इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध है।हाल ही में इंटनरेट कंटेंट डिलेवरी नेटवर्क यानी एकेएएमएआई (अकामाइ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरनेट स्पीड के मामले में भारतका स्थान दुनिया में 115वां है। वहीं दक्षिण कोरिया में औसत इंटरनेट स्पीड 24.6एमबीपीएस है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में औसत उच्चतम इंटरनेट स्पीड 14एमबीपीएस है, जिसमें से केवल 1.2 प्रतिशत इंटरनेट उपभोक्ताओं के पास ही 10एमबीपीएसकी स्पीड है।
    उल्लेखनीय है कि अगस्त में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वकांक्षी डिजिटल इंडिया परियोजना के लिए एक लाख करोड़ रुपए का आबंटन किया है। इस राशि का उपयोग सन 2019 तक देश के प्रत्येक गांव में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराने में किया जाएगा।पीएमओ के कम्प्यूटर्सआरटीआई से यह भी पता चला है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के कम्प्यूटर्स विंडोज-7/विंडोज-8 एवं विंडोज तथा लिनक्स सर्वर प्रणाली पर काम कर रहे हैं।
    गौरतलब है कि एडवर्ड स्नोडेन द्वारा अमेरिकी जासूसी कार्यक्रम प्रिज्म के खुलास के बाद चीन तथा कई अन्य देशों ने विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया है। लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय अब भी इन्हीं ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भर है।रंगनाथन ने आरटीआई के माध्यम से पीएमओ में हुई कम्प्यूटर हैकिंग की घटनाओं की जानकारी मांगी थी, लेकिन पीएमओ ने इसे खारिज कर दिया।

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