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    टर्म्स पढ़ने के बाद ही 'आई एग्री' बटन दबाएं

    ज्यादातर लोग ऑनलाइन खरीदारी करते समय या इंटरनेट पर जानकारी शेयर करने के दौरान बिना सोचे समझे 'आई एग्री' बटन दबा देते हैं। गैर-जरूरी समस्याओं से बचने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए!

    कुछ वर्ष पहले एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें लगभग 7,500 लोगों ने अनजाने में ब्रिटेन की ऑनलाइन गेमिंग सॉफ्टवेयर रिटेलर गेमस्टेशन को अपनी आत्मा बेच दी थी। रिटेलर ने मजाक के तौर पर नियमों और शर्तों (टीएंडसी) में 'इमोर्टल सोल्स' की क्लॉज जोड़ दी थी, इससे कानूनी तौर पर उसे उन ग्राहकों की 'आत्माओं' का मालिकाना हक मिल गया था, जिन्होंने उससे खरीदारी की थी। यह भले ही हंसी की बात लगे, लेकिन इससे ठगी वाले नियमों और शर्तों की बात सामने आई, जिनके लिए हम अक्सर उन्हें पढ़े बिना सहमत हो जाते हैं। कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 12 फीसदी से भी कम लोग नियमों और शर्तों को पढ़ते हैं।

    कंपनियों को गलत इरादों से दायर किए जाने वाले कानूनी मामलों से अपने हित सुरक्षित रखने होते हैं, लेकिन आपको उन नियमों और शर्तों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए, जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रसीजर से ज्यादा होती हैं। कंज्यूमर को अगले स्टेप पर बढ़ने के लिए शर्तों को मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है, चाहे वह किसी सर्विस के इस्तेमाल का मामला हो या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने का। भारत के सबसे पॉपुलर डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर के नियमों और शर्तों को देखें: 'हम किसी भी समय, आपको पहले नोटिस दिए बिना, किन्हीं भी शर्तों और स्थितियों, को पूरी तरह या आंशिक तौर पर, को जोड़ने या अलग करने, आपको दिए गए ऑफर्स या उन्हें पूरी तरह वापस का अधिकार संरक्षित रखते हैं।'

    इन शर्तों को मानने का मतलब यह है कि कंपनी की सर्विस लेने तक आप उसकी सभी बातों को मानने की हामी भर चुके हैं। इसलिए 'आई एक्सेप्ट' को क्लिक करने से पहले आपको इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

    फ्री मोबाइल ऐप्स
    आपके स्मार्टफोन या टैबलट के लिए बहुत से कथित फ्री ऐप के साथ विज्ञापन भी होते हैं। शर्तों को पढ़ें- ऐप टारेगेटड ऐड्स देने के लिए आपकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल की जा सकती है। इसके साथ ही जब भी ऐप ऐक्टिव होगा, तो मोबाइल ऐड्स दिए जाएंगे। इससे आपका डेटा यूसेज बढ़ेगा।

    टि्वटर-फेसबुक अकाउंट्स की सुरक्षा
    इन दिनों कई वेबसाइट्स आपको मौजूदा टि्वटर, गूगल या फेसबुक अकाउंट से साइन-इन करने और उनकी सर्विसेज का इस्तेमाल शुरू करने की इजाजत देती हैं। हालांकि, आप रजिस्ट्रेशन प्रोसेस छोड़ सकते हैं, लेकिन वेबसाइट विजिटर की पहचान कर लेती है और उसे ज्यादा जानकारी मिल जाती है। फेसबुक, गूगल कनेक्ट और टि्वटर साइन-इन के इस्तेमाल की आधिकारिक तौर पर अनुमति है, लेकिन आपको इससे अपनी ओर से ऑटोमेटेड पोस्ट्स और ट्वीट्स की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साइट या ऐप को अपने अकाउंट तक पहुंच देने से पहले उन परमिशंस को देख लें, जो आप उन्हें दे रहे हैं। अगर इसमें कहा जाता है, 'एलाओ ऐप/साइट टू पोस्ट/सेंड ट्वीट' या 'ग्रांट परमिशन टु पोस्ट ऑन योअर बिहाफ' तो इसे कैंसिल कर बाहर निकल जाएं।

    फोटो शेयरिंग और प्रिंटिंग वेबसाइट्स
    आपके पास फोटोग्राफ्स के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स होते हैं, लेकिन तब क्या होगा, जब आप उन्हें फोटो शेयरिंग वेबसाइट पर लोड करते हैं? अगर आप उन्हें स्टॉक फोटो साइट पर अपलोड करते हैं तो उनका मालिक कौन होगा? या किसी फोटो प्रिंटिंग वेबसाइट पर? आपको यह जानकर धक्का लग सकता है कि कई फोटो शेयरिंग/प्रिंटिंग वेबसाइट्स आपके फोटो का जैसा वे ठीक समझें, इस्तेमाल करने का अधिकार रखती हैं।

    ई-मेल पर व्यक्तिगत जानकारी की शेयरिंग
    क्या आपने ध्यान दिया है कि आपके ईमेल इनबॉक्स में टेक्स्ट ऐड्स क्यों इतनी बड़ी संख्या में आते हैं? अगर आपके पास बेबी है, तो बेबी क्लोदिंग स्टोर्स के ऐड्स दिखने शुरू हो जाएंगे। अगर आप फोटोग्राफर हैं तो कैमरा स्टोर्स नजर आने लगेंगे और अगर आप किसी दोस्त के साथ डिनर की बात कर रहे हैं तो लोकल रेस्टोरेंट्स की भरमार होगी।

    टिकट्स ऑनलाइन खरीदना/बुकिंग
    एयरलाइन टिकट्स के मामले में प्राइसेज ऊपर-नीचे होते रहते हैं और आपको यह जानने के लिए शर्तों को ध्यान से पढ़ना होगा कि आप टिकट वापस कर रिफंड ले सकते हैं या नहीं। बहुत सी 'स्पेशल फेयर टिकट्स' इस शर्त पर बेची जाती हैं कि वे वापस/रिफंड नहीं होंगी।

    ऑनलाइन शॉपिंग
    क्या आपने कभी सोचा है कि आपका नाम और ईमेल एड्रेस ऐसी वेबसाइट्स पर कैसे पहुंच जाता है, जिनके बारे में आपने कभी सुना ही नहीं है? जब भी आप न्यूजलेटर्स के लिए साइन-अप करते हैं, किसी आर्टिकल पर कमेंट करते हैं या किसी कम्युनिटी फोरम में जाते हैं, तो आपकी व्यक्तिगत जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वेबसाइट आपको ई-मेल स्पैम (स्पेशल ऑफर्स) भेजना शुरू कर देती है और यह बिना आपकी मर्जी के आपकी ईमेल आईडी थर्ड पार्टीज को भी बेच सकती है।

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