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    सोनू निगम : - अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का गाने ने बचायी सोनू निगम का कैरियर। सोनू निगम का फ़िल्मी सफ़र।जाने






    कोई मजबूरी स्थायी नहीं
    सोनू निगम के घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। सोनू निगम के पिता मंच के कलाकार थे और तीन साल की उम्र में ही उन्होंने पिता के साथ मंच पर आमद दर्ज करा ली थी। उनका लक्ष्य गायन के क्षेत्र में नाम कमाना था। वे दिन उनके स्कूल जाने और खेलने के थे, लेकिन उन्हें होटलों और शादी-ब्याह में मंच पर गाना पड़ता था। उनके पिता और वह जानते थे कि मजबूरी का यह दौर खत्म होगा और हुआ भी। सोनू हर दिन कुछ न कुछ नया करने के लिए जुटे रहे और विफलताओं को पार करते हुए खुद का मुकाम हासिल करने में कामयाब रहे। उनका संकल्प यही था कि कोई भी काम अगर मजबूरी में किया जा रहा है या करना पड़ रहा है, तो वह कभी स्थायी नहीं हो सकता।


    हर भूमिका में सर्वश्रेष्ठ
    सोनू निगम ने हर तरह की भूमिका में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। बाल गायक के रूप में जब उन्होंने गायन प्रतियोगिताओं में गाना शुरू किया, तो लगभग हर बार उन्हें ही पुरस्कार मिला। अंतत: आयोजकों ने उन्हें बाल गायक की सूची से ही बाहर कर दिया और उन्हें वयस्क गायकों की सूची में डाल दिया। सोनू जब अपने पिता के साथ मुंबई शिफ्ट हुए और फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम मिला, तो उन्होंने पांच फिल्मों में भूमिकाएं कीं। जब उन्होंने टी सीरीज के लिए कवर वर्जन गाए, तो वे भी बेहतरीन थे। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है। राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड, जी सिने, आईफा, स्टार स्क्रीन आदि अनेक देशी-विदेशी अवॉर्ड उनकी झोली में हैं। उन्होंने जो भी किया, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।




    नकल करने से बचना
    सोनू निगम के पिता मो. रफी के भक्त होने की हद तक प्रशंसक थे। वह रफी साहब के नगमें खूब गाते थे। सोनू ने भी अपने गायन की शुरुआत रफी के नगमों से ही की थी। लोग उन्हें दूसरा रफी कहने लगे। 31 जुलाई, 1980 को रफी साहब का इंतकाल हो गया और उस दौर में कवर वर्जन खूब चल पड़े थे, जो असली एलबम से काफी सस्ते और सर्वसुलभ थे। टी सीरीज के लिए सोनू ने दर्जनों कवर वर्जन प्रति एलबम पांच-पांच हजार रुपये में रिकॉर्ड करवाए। आज पुरानी राहों से.., टूटे हुए ख्वाबों ने.., ये आंसू मेरे दिल की जुबान हैं.., सौ बार जनम लेंगे.., तकदीर का फसाना.. जैसे दर्जनों गाने सोनू ने गाए, जो हू-ब-हू रफी का स्वर लगते थे। ऐसा लगता था कि अब सोनू का कैरियर खत्म, क्योंकि रफी के डुप्लीकेट की मार्केट में कितने दिन मांग रहती। सोनू इस स्थिति को समझ चुके थे और अपनी आवाज में पार्श्व गायन करने लगे थे।
    अलग पहचान की जरूरत
    सोनू निगम ने संगीत निर्देशिका उषा खन्ना के आशीर्वाद से अमर उत्पल के संगीत निर्देशन में फिल्म आजा मेरी जान के लिए पहला गाना रिकॉर्ड कराया था। लेकिन फिल्म में यह गाना नहीं लिया गया। इस फिल्म में उनके पांच गाने रिकॉर्ड कराए गए, लेकिन एक गाना ही लिया गया। 1995 में टी सीरीज के गुलशन कुमार की फिल्म बेवफा सनम के एक गाने अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का ने उन्हें पहचान दिलवाई। 1 मई, 1995 से ही टीवी पर सा-रे-गा-मा शो शुरू हुआ और वह इसके होस्ट थे। यह कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुआ। साल 1997 में बॉर्डर फिल्म के संदेशे आते हैं.. गीत से उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने में काफी मदद मिली।




    सही तालीम, सही लक्ष्य
    सोनू केवल बारहवीं कक्षा तक ही स्कूल गए। स्नातक की डिग्री उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पाई, लेकिन उन्होंने शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है, जिसके कारण वह अपने गायन को परिपूर्ण बनाने में सफल हुए हैं। सही तालीम के कारण ही वह अपने लिए सही भूमिका चुन सके। बाल कलाकार के रूप में बेताब, कामचोर, तकदीर, हम से है जमाना, उस्तादी उस्ताद से जैसी फिल्मों में काम करने के बाद वह जानी दुश्मन, काश आप हमारे होते, लव इन नेपाल और मराठी फिल्म नवरा माझा नवसाचा में भी काम कर चुके हैं। सोनू शांतनु-निखिल के फैशन शो में रैम्प पर भी कदम-ताल कर चुके हैं, लेकिन वह जानते हैं कि उनका भविष्य गायन में है। उन्होंने अपनी कला को पाश्र्व गायन तक सीमित रखने की बजाय उसे लाइव शो, टीवी कार्यक्रम, प्राइवेट एलबम और देश-विदेश के कलाकारों के साथ काम करने तक विस्तार दिया है।
    सफलता को बांटना सीखो
    सोनू निगम अपने शरीर और लुक्स का खास ध्यान रखने वाले शख्स हैं। वह रोज योगासन करते हैं। वह बाकायदा ताइक्वांडो के प्रशिक्षित खिलाड़ी हैं। सोनू अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान भी करते हैं। दान की राशि वह उजागर नहीं करते, लेकिन कैंसर, दृष्टिहीनता, कुष्ठ रोग, एड्स जैसी बीमारियों से लड़ने वाले संगठनों की वह मदद करते रहते हैं। नकद दान के अलावा वह मुफ्त में शो भी करते हैं। सोनू कहते हैं कि कामयाबी तभी कामयाबी है, जब उसका फायदा सबको मिले।



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