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    धर्म एवं अंधविष्वास कि बेड़ियों में जकड़ी इंसानियत।







     हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई जैन बौद्ध धर्म आदि ना जानें कितने धर्म इंसानो ने बना डाले। परंतु आज इसी धर्म की वजह से लोग इंसानियत को भूल कर एक दूसरे की जान लेने पर तुले हुए है। क्या इसीलिए ये सब धर्म बने हुए है।
            इक्कसवीं सदी आ गयी पढ़े लिखो की संख्या निरंतर बढ़ रही है। लेकिन इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है कि खुद पढ़े लिखो लोग ही अंधविष्वास को बढ़ावा दे रहे हैं कोई अपने फायदे के लिए तो कोई अपने धर्म के लिए तो कोई अपने जात पात के लिए कोई झाड़ फूँक के नाम पर आखिर कब जागेंगे हम कब इंसान को इंसान की आँखों से देखेंगे हम।
             आज लोग चाँद मंगल तक पहुँच गये है लेकिन साँप काटने पर अस्पताल कि बजाय झाड़ फूंक वालो के पास जाते है क्योंकि उन्हें नही पता कि उत्तर एवं पूर्व भारत के 99% साँप जहरीले नही होते सिर्फ कुछ सांपो को छोड़कर। ऐसे में साँप के काटे जाने पर 100 में से कोई एक मरता है तो लोंगो का इसपर ध्यान नही जाता कि जहरीले सांप के काटने से मरा है लोग सोचते है कोशिश किये लेकिन नहीं बचा पाये। परन्तु अगर उसे समय पर पहले अस्पताल ले जाते तो एंटीवेनम इंजेक्शन से बचाया जा सकता था। लेकिन नही पहले ढोंगी बाबाओ के पास जायेंगे।
       
    हिन्दू धर्म अंधविष्वास का पिटारा।
        हिन्दू धर्म में लोग धर्म का मजाक बनाकर रख दिए है मैं भी हिन्दू हूँ लेकिन मेरे लिए इंसानियत पहले धर्म बाद में है अभी अभी गणेश जी को लोग पूजा कर रहे थे तो मै भी कई जगह लोगो ने बुलाया तो मैं गया तो देख रहा हूँ सामने बैठे है गणेश जी और ठीक सामने उनके जुवा खेल रहे है भक्तगण रात भर जुवा ताश दिनभर DJ के कानफोड़ू आवाज। एरिया के जितने भी टपोरी गड दुल्ले है सभी लोगों के दर्शन आपको हो जायेंगे वहाँ पर। और हद तो तब हो गयी जब मैं एक गड़पति के बिसर्जन में गया। दारू पी के नाचते टपोरी और DJ पर चल रहा था बेबी को बेस पसंद है। मुन्नी बदनाम हुई खाइके पान बनारस वाला, शांता बाई, लगावलु जब लिपिस्टिक। आदि आइटम सॉन्ग सुनके अगर आज गणेश जी जिन्दा होते तो खुद सुसाइड कर लेते। ये कैसी भक्ति है कि भगवान् को आइटम सॉन्ग सुना के भक्ति कर रहे हो।  आधे से ज्यादा पाखण्ड हिन्दू धर्म में पंडितो एवं ब्राम्हणों ने फैला कर रखा है अन्धविश्वास के लिए यही लोग आधा जिम्मेदार है।

           मुस्लिम धर्म दुनिया का सबसे खतरनाक एवं खुनी धर्म।
                आज मै ये पोस्ट लिख रहा हु और आज बकरीद भी है क्या किसी बेजुबान जानवर को मारकर खाना ही आपका धर्म है जिसको जिंदगी बनानेवाले वाले ने दिया क्या खुद के लिए उसकी ज़िन्दगी चाहेगा। क्या तुम बेजुबान जानवरो कि हत्या करके अपना धर्म निभा रहे हो। जिहाद के नाम पर लाखों बेक़सूर लोगो का खून बहाना क्या यही सिखाता है तुम्हारा धर्म।




            किस घमंड में जी रहे है लोग सिर्फ 70 या 80 साल के लिए आते है इस धरती पर और खुद को धर्म का रच्छक बनते हो कभी जन्नत के नाम पर तो.....कभी जिहाद। इस जन्नत को छोड़कर मरने के बाद की सोचते है।
         बड़े बड़े भोपू लगाकर रोज चिल्लाना क्या ये भक्ति है जब ये सब नही था तब कैसे चिल्लाते थे।
          आते जाते रोड पर कभी भी कही भी नमाज शुरू।

          जैन धर्म सबकुछ होके भी भोगना।

                जैन धर्म के लोग सुबह सुबह बिना चप्पल के पैदल मिलो दूर जाकर घंटो तक घण्टा बजाते हो। फिर ज़मीन के अंदर की चीज़े मत खाओ जैसे आलू,प्याज,मूली,गाजर,शकरकंद अरे जब तुम्हारा धर्म यही सब सिखाता है तो ये कैसा धर्म क्या ये आलू प्याज भगवान् ने नही कोई हिन्दू या मुस्लिम ने बनाया है। सूरज ढलने से पहले खाना खाओ मुह पर कपड़ा बाँध कर व्हीलचेयर पर कोई तुम्हे यहाँ से वहां ले जाये हाथ पैर होते हुए भी अपाहिज जैसी ज़िन्दगी जीने पर मजबूर कर दे क्या यही धर्म है तुम्हारा।

        सिख धर्म प्राकृतिक जीवन का हरड़।

           सिख धर्म सिर पर 20 किलो का कपड़ा बांधकर घूमना। बनाने वाले ने इंसानो जैसा बनाया और तुम्हारे धर्म ने तुम्हारे सिर पर गठरी बाँध दी। फिर भी और धर्मो से शांत है आपका धर्म।

       ईसाई धर्म बियर पिने का लाइसेंस।

    ईसाई धर्म में लोग एक ओर प्रार्थना करके निकले है दूसरी ओर बियर लेके बैठ जाते है टुन्न होने।

    बौद्ध धर्म समाज से खुद को अलग।

       बौद्ध धर्म में न तुम खुद से कोई पसंद का कपडा पहन सकते और ऊपर से हमेशा बाल का मुंडन कराके घूमने के लिए ही ये धर्म बना है। क्या तुम्हारा धर्म तुम्हे समाज की मुख्यधारा में आने से ख़त्म हो जायेगा।

    अब भी समय है हर इंसान को इंसानियत की नज़र से देखना सुरु करो। फिर देखो कोई भी इंसान इस पुरे पृथ्वी का भूखा नही सोयेगा। कोई किसी की जान नही लेगा हर धर्म के लोग खुश रहेंगे।
        जिस धर्म में हिंसा हो वो धर्म धर्म नही है सब अपने धर्म निभाओ लेकिन इंसानियत को भूलकर नही......नही तो एक दिन ना धर्म बचेगा ना धर्म को मानने वाले लोग।

                                                  लेखक:- बृजेश यादव
                                     Admin:- Hindi Tech News



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