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    भोजपुरी सिनेमा। बेशर्मी एवं फूहड़ता का नंगा नाच।





    भोजपुरी सिनेमा। बेशर्मी एवं फूहड़ता का नंगा नाच।


      भोजपुरी का प्रचार प्रसार आज काफी बढ़ चुका है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा लीजिये कि भोजपुरी आज भारत के राज्य उत्तर प्रदेश एवं बिहार कि सीमा से निकल कर भारत समेत दुनिया के 12 देशों में बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। ये इस भाषा की बदनसीबी है कि अभी तक भारत कि संविधान के आठवी सूची में अभी तक इसे जगह नही मिली क्योंकि भोजपुरी प्रदेश के लोगो को खुद भोजपुरी बोलने में शर्म महसूस होता है। भोजपुरी छेत्र के अग्रणी लोग खुद भोजपुरी के लिए कुछ करते नही है।
        लगभग हर साल 50 से ज्यादा भोजपुरी फिल्म बन रही है और अच्छा व्यसाय भी कर रही है लेकिन आज जिस तरह से भोजपुरी फिल्म गानों के एल्बम में सेक्स का तड़का एवं द्विअर्थी भाषा का प्रयोग हो रहा इसे देखकर खुद शर्म से सिर झुक जाता है। ऐसे ऐसे गाने  मैं यहाँ कुछ ऐसे गाने बता रहा हूँ जो फुहड़ता की सारी सीमाएं लांघ चुकी है। छोट बाटे छेदा तनी अंगूरी घुसावे दा।,हमार जीजा जी दिन में न बोले की रतिया में चोली खोले।, देवरा जीभ घुसाके चाटता, चोली के अंदर उठता भूकंप,मज़ा लूटा लगाके कंडोम रजऊ, मन करता कि डाल दी। खैर मैं तो सुनता नही इसलिए मुझे ज्यादा मालूम नही लेकिन और भी ऐसे कितने सेक्स से भरपूर भोजपुरी गाने है जिन्हें आप परिवार के साथ बैठ के सुन नही सकते लेकिन UP Bihaar वाले बिन्दास सुनते है सोचो घर में बहन बेटियोँ के सामने ऐसे गाने क्या असर डालेंगे। लेकिन एक सच ये भी है कि ऐसे गानों को लोग बड़े चाव से सुनते है और सुपरहिट भी कराते है सुन सुन के।




    समाज में जिस चीज़ की मांग रहेगी लोग वही बेचेंगे अगर भोजपुरी को साफसुथरी भाषा बनाना है तो पहले लोगो को खुद बदलना होगा अपनी सोच को खुद को तभी भोजपुरी में अश्श्लीलता बंद होगी नही तो कभी बंद नही होगा।           भोजपुरी का एक वह भी दौर था जिसे भोजपुरी का गोल्डन पीरियड कहना गलत नही होगा। जब 1964 में पहली भोजपुरी फिल्म बनी गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ियबे तब से लेकर 1990 तक भोजपुरी फिल्म के लिए गोल्डन पीरियड साबित हुआ था।
       उस दौर कि कुछ उल्लेखनीय फिल्मे थी गंगा मैया, हमार बेटवा, बलम परदेशिया, गंगा जैसन भौजी हमार, घर अंगना, ई कइसन कन्यादान, बैरी पिया, हमार संसार, गंगा किनारे मोरा गॉव, साईंया हमार, गंगा के पार सैंया हमार, बबुआ हमार इन फिल्मों में भोजपुरिया माटी की महक होती थी। उस समय के भोजपुरी फिल्मों में गाने मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोषले, महेंद्र कुमार, हेमलता, जैसे गायक गाना देते थे फिल्मो में जिसे सुनकर सच में कितना सुकून का एहसास होता था। उस समय के कुछ सुपरहिट गाने। हे डॉक्टर बाबु बताई न दवाई, फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी, गोरकी पतरकी रे, जेठ महिनवा के दिन दुपहरिया, गंगा किनारे मोरा गांव, रीतियां पिरितिया के, जैसे सुरीले गाने थे।
       अब ज़रूरत है भोजपुरी को बचाने का ऐसे लोग जो भोजपुरी को सिर्फ पैसे के लिए बदनाम कर रहे है उनके खिलाफ आवाज़ उठाने का। और कोई और नही आएगा आवाज़ उठाने ये हर भोजपुरी भाषी की जिम्मेदारी है। वो अपनी संस्कृति एवं भाषा का बचाव करे।

                                            लेखक:-  बृजेश यादव






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