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1 महीने से 6 महीने के बीच शुरू हो सकता है पीरियड्स

1 महीने से 6 महीने के बीच शुरू हो सकता है पीरियड्स  वैसे तो पीरियड्स साइकल के दोबारा शुरू होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। जैसे- आप अपने शिशु को ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं या नहीं। अगर ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं तो कितनी मात्रा में बच्चा आपका दूध पीता है। लेकिन अधिकांश मामलों में प्रसव के बाद 1 महीने से लेकर 6 महीने के बीच कभी भी दोबारा से पहला पीरियड्स शुरू हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि जब तक आप अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करवाती रहें तब तक आपका मेन्स्ट्रुअल साइकल फिर से शुरू ना हो। ब्रेस्टफीडिंग और पीरियड्स शुरू होने के बीच है लिंक बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करवाने का सीधा संबंध प्रेग्नेंसी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होने से है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं के शरीर में ब्रेस्ट मिल्क के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हॉर्मोन प्रोलैक्टिन, ऑव्यूलेशन की प्रक्रिया को रोक देता है और इसलिए पीरियड्स फिर से शुरू नहीं होते। यही वजह है कि जो महिलाएं बच्चे को अपना दूध नहीं पिलातीं उन्हें तो 4 से 8 हफ्तों के अंदर दोबारा पीरियड्स आ जाता है। लेकिन जो महिलाएं बच्चे को नियमित रूप से ब्रेस्टफीडिंग करवात

गर्भवती ना होने के चिकित्सकीय कारण

गर्भवती ना होने के चिकित्सकीय कारण (Pregnant na hone ke medical karan) काफी समय से लगातार गर्भधारण करने की कोशिश करने के बावजूद गर्भवती ना होना शादीशुदा जोड़ों को परेशान कर देता है। हर तरह से स्वस्थ जोड़ों को भी गर्भधारण करने में एक साल तक का समय लग सकता है। इसलिए आपको हिम्मत हारे बिना कोशिश करनी चाहिए। इससे पहले कि आप यह मानकर बैठ जाएं कि आपको बांझपन जैसी कोई समस्या है, आपको यह जानना चाहिए कि आप गर्भवती क्यों नहीं हो पा रही हैं, ताकि आप समझ सकें कि आपको गर्भवती होने के लिए क्या करना चाहिए। इस ब्लॉग में हम आपको प्रेगनेंट ना होने के मेडिकल कारण और समस्याओं के संभावित उपाय बता रहे हैं। गर्भधारण ना होने के मेडिकल कारण क्या हैं? (Garbhdharan na hone ke medical karan kya hai) कई बार आपके गर्भवती ना होने के पीछे किसी शारीरिक समस्या का हाथ हो सकता है। समस्या का जल्दी पता लगाने से उसके सही होने की ज्यादा संभावना होती है। हम नीचे आपके गर्भधारण ना कर पाने के संभावित चिकित्सकीय कारण बता रहे हैं, ताकि आप गर्भवती होने के लिए सही कदम उठा पाएं - 1. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : अनियमित मा

प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : शरीर में प्रोजेस्टेरोन की कम मात्रा

प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : शरीर में प्रोजेस्टेरोन की कम मात्रा (Pregnant na hone ke karan : Body me progesterone ki matra kam hona) अंडे के निषेचन के बाद उसके गर्भाशय से जुड़ने और विकसित होने में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की अहम भूमिका होती है। ओवुलेशन के बाद अंडे का कोष, कोर्पस ल्युटियम बन जाता है और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन बनाने लगता है। इस प्रक्रिया में कोई रुकावट आने पर इस हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है और आप गर्भवती नहीं हो पाती हैं। अगर आप गर्भधारण कर भी लेती हैं, तब भी प्लेसेंटा और भ्रूण का विकास नहीं होता है और वह मर जाता है या गर्भपात हो जाता है। कुछ अन्य स्थितियों में भी ऐसा हो सकता है। इससे राहत कैसे पाएं? इस स्थिति में, डॉक्टर आपको प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की गोलियां दे सकते हैं या फिर आपकी योनि व गर्भाशय में प्रोजेस्टेरोन के इंजेक्शन लगा सकते हैं। इससे गर्भाशय में भ्रूण के विकास के लिए, रक्त से भरपूर परत बनने में मदद मिलती है। 8. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : सर्वाइकल म्यूकस संबंधी समस्या (Pregnant na hone ke karan : Cervical mucus se judi problems) ओवुलेशन के

Period - मासिक चक्र लेट होने के कारण Period kyo late hota hai?

अनियमित मासिक चक्र :  जिन महिलाओं को अनियमित मासिक चक्र की समस्या रहती है, उन्हें अनियमित ओव्युलेशन का सामना करना पड़ता है। इस कारण उन्हें गर्भधारण करने में अधिक समस्या होती है। जो महिला जितना कम ओव्युलेट करेगी उसके गर्भवती होने की संभावना उतनी ही कम होगी एंडोमेट्रियोसिस :  यह महिलाओं से संबंधी एक ऐसा विकार है, जो सीधे तौर पर उनकी प्रजनन क्षमता को बाधित करता है। कारण यह है कि इस समस्या में एंडोमेट्रियल कोशिकाएं (गर्भाशय की कोशिकाएं) गर्भाशय से बाहर की ओर बढ़ने लगती हैं, जो फैलोपियन ट्यूब में रुकावट का कारण बनती है। इस कारण शुक्राणु और महिलाओं के सक्रिय अंडों का मिलन नहीं हो पाता। इस समस्या में महिलाओं को बार-बार पेशाब महसूस होना, संभोग के दौरान दर्द, मल त्याग में परेशानी जैसे लक्षण महसूस होते हैं  ओव्युलेशन की समस्या :  कई महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने का कारण ओव्युलेशन की समस्या होती है। माना जाता है कि कुछ खास आदतों, सर्जरी या फिर हार्मोनल समस्या की वजह से महिलाओं में ओव्युलेशन से संबंधित परेशानी पैदा होती है। जो पूर्ण रूप से बांझपन या गर्भधारण करने में मुश्किल का कारण बनती ह