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    Mount Everest माउंट एवरेस्ट से जुड़े रोचक तथ्य।

    About Mount Everest-

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    1. Mount Everest माउंट एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है जिसकी समुंद्र तल से ऊँचाई 8,850 मीटर है। यह नेपाल में स्थित है।
    2. Mount Everest एवरेस्ट पर्वत को नेपाल के लोग सागरमाथा कहते है। यह नाम नेपाल के इतिहासकार बाबुराम आचार्य ने 1930 के दशक में रखा था। सागरमाथा का अर्थ होता है – स्वर्ग का शीर्ष।
    3. संस्कृत में एवरेस्ट पर्वत को देवगिरि और तिब्बत में सदियों से चोमोलंगमा अर्थात् पर्वतों की रानी के नाम से जाना जाता रहा है।
    [caption id="attachment_2991" align="aligncenter" width="300"] Mount Everest[/caption]
    4. Mount Everest पर्वत का अंग्रेज़ी नाम इंग्लैंड के जार्ज एवरेस्ट पर रखा गया है। वह एक वैज्ञानिक थे जिन्होंने 1830 से 1843 की बीच भारत की ऊँची चोटियों का सर्वेक्षण किया था।


    5. Mount Everest माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने का सबसे अच्छा समय मार्च से मई के बीच माना जाता है। इस दौरान बर्फ़ ताजा होती है, बारिश भी ना के बराबर होती है और अच्छी धूप की वजह से मौसम भी गुनगुना रहता है।
    6. अब तक करीब 5000 लोग माऊंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने में सफल रहे हैं, जिनमें एक 13 साल का लड़का, एक अंधा व्यक्ति और 73 साल की एक जापानी महिला बुजुर्ग भी शामिल है।
    7. सागरमाथा पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहयों को पहले 25,000 डॉलर (करीब 15.56 लाख रूपए) फीस देनी होती थी, पर वर्ष 2015 में नेपाली सरकार ने इसे कम करके 11,000 डॉलर (करीब 6.82 लाख रूपए) कर दिया।
    8. आपको जानकर हैरानी होगी कि 1974 के बाद साल 2015 ही ऐसी साल रहा जब कोई भी एवरेस्ट पर्वत के शिखर पर नही पहुँच पाया। इसका मुख्य कारण था अप्रैल 2015 में नेपाल में आना वाला भयानक भुकंप।
    9. Mount Everest एवरेस्ट पर्वत पर गए हर 100 में से 4 लोगों की मौत हुई है। कई तो ऐसे भी है जो पर्वत के शिखर पर पहुँचने के बाद नीचे उतरते समय अपनी जान गंवा बैठे।
    10. Mount Everest माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने के जुनुन को लेकर अब तक 200 से जयादा लोग अपनी जान गंवा चुके है। उनकी लाशे आज भी माऊंट एवरेस्ट पड़ी हुई हैं क्योंकि उन्हें इतनी ऊपर से नीचे लाना आसान काम नही है।
    11. माऊंट एवरेस्ट पर पड़ी हुई लाशे बफ़्रीले माहौल के कारण जल्दी खत्म नही होती। कई बार तो चढ़ाई करने वाले इन लाशों पर पैर रखकर ऊपर चढ़ने या नीचे उतरने का सफ़र तय करते है।

    12. Mount Everest पर सबसे ज्यादा मौते शिखर के करीब के हिस्से में होती है जिसे ‘डेथ जोन’ भी कहा जाता है। लोग अकसर चढ़ाई करने के समय गलती करके अपनी जान गंवा बैठते है।
    13. माऊंट एवरेस्ट पर जाने वाले लोग अपने साथ काफी सारा सामान और खाने-पीने की चीज़े लेकर जाते है, जिससे पर्वत पर काफी कूड़ा जमा हो जाता है। एक अनुसान के अनुसार माऊँट एवरेस्ट पर 50 टन कूड़ा है जो इसे दुनिया का सबसे गंदा पर्वत बनाता है।
    14. पानी का उबाल दर्जा 100°C होता है, पर माऊंट एवरेस्ट के शिखर पर यह महज 71°C रह जाता है।
    15. माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने के 18 अलग – अलग रास्ते हैं।
    16. एवरेस्ट हर साल 2 सेंटीमीटर की दर से और ऊँचा हो रहा है।
    17. वर्ष 2011 में दो नेपाली व्यक्ति सिर्फ 48 मिनट में पैरागलाडिंग की सहायता से माऊंट एवरेस्ट के शिखर से नीचे उतर गए, जब कि चोटी से नीचे उतरने का औसतन समय 3 दिन है।


    18. Mount Everest पर्वत नेपाल के अप्रैल 2015 के भुकंप के कारण ढाई सेंटीमीटर नीचे धस गया था।
    19. गर्मियों में माऊंट एवरेस्ट के शिखर का औसतन तापमान -20°C होता है सर्दियों में -35°C.
    20. एवरेस्ट पर्वत समुंद्र तल के हिसाब से दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है, पर अगर बात तल से लेकर शिखर तक की ऊँचाई की जाए तो हवाई द्वीप समूह का Mouna Kea (माऊना किया) पर्वत माऊँट एवरेस्ट से भी 1 किलोमीटर लंबा है। माऊना किया पर्वत का लगभग 6000 मीटर का हिस्सा समुंद्र में है और बाकी का समुंद्र के बाहर। समुंद्र तल से इसकी ऊँचाई 4207 मीटर है।


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