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    कैसे खुलता है पीपीएफ खाता, क्या है इसकी खासियतें





    पीपीएफ का नाम आते ही लोगों का ध्यान ऑफिस वाले पीएफ अकाउंट की तरफ चला जाता है जिसमें आपकी सैलरी से कुछ पैसा काटकर आपके ही एक खाते में जमा करा दिया जाता है। लेकिन यह जान ले कि आपके ऑफिस वाले पीएफ अकाउंट के अलावा भी एक पीपीएफ खाता होता है जो आपको आयकर में छूट, रिटायमेंट की बेहतरीन प्लानिंग और बचत के शानदार विकल्प मुहैया कराता है। ऑफिस वाले पीएफ अकाउंट को ईपीएफ नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इसकी तमाम सुविधाएं पीपीएफ अकाउंट से अलग होती हैं। इललिए पीएफ और पीपीएफ के अंतर को गहराई से समझकर ही निवेश का निर्णय लें। ऑफिस के ईपीएफ और बैंक-पोस्ट ऑफिस वाले पीपीएफ में अंतर- ईपीएफ- पीएफ अकाउंट वह कोष होता है जो नौकरी पेशा लोगों के लिए होता है। इसमें आपका नियोक्ता आपकी सैलरी से कुछ निश्चित अमाउंट काटकर (मौजूदा समय में 12 फीसदी) पीएफ ऑफिस में जमा करा देता है। यह तय रकम सरकार द्वारा निर्धारित होती है और इस तय रकम में नियोक्ता भी अपना हिस्सा (हमारी सीटीसी का हिस्सा) जोड़कर जमा कराता है।




    इसमें आपके निवेश पर 8.5 फीसदी ब्याज मिलता है। ईपीएफ का पैसा आप अपनी मौजूदा नौकरी छोड़ने के बाद कभी भी निकाल सकते हैं। पीपीएफ- पब्लिक प्रोविडेंट फंड केंद्र सरकार द्वारा संचिलित एक स्कीम है। यह स्कीम बैंक और पोस्ट ऑफिस द्वारा चलाई जाती है। आप अपनी स्वेच्छा से इसमें अपना खाता खुलवा सकते हैं। ऐसा खाता खुलवाने के लिए जरूरी नहीं कि आप वैतनिक हों। अगर आप बतौर सलाहकार, फ्रीलांसर और संविदा (अनुबंध) के आधार पर काम करते हैं तब भी आप अपना खाता खुलवा सकते हैं। इसमें आपके निवेश पर 8.7 फीसदी ब्याज मिलता है। पीपीएफ का पैसा आमतौर पर 15 साल की मैच्योरिटी के बाद ही निकाला जा सकता है। ऐसे खुलावाएं अपना पीपीएफ खाता- पीपीएफ खाता खुलवाने के लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि आपका बैंक में पहले से ही खाता हो। आप किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में जाकर या पोस्ट ऑफिस में जाकर अपना पीपीएफ अकाउंट खुलवा सकते हैं। इस तरह के खाते में 15 साल के लिए आपका पैसा फ्रीज हो जाता है। खाता खुलवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है आपको पहले बैंक या पोस्ट ऑफिस का चुनाव करना होगा जहां आप अपना खाता खुलवाना चाहते हैं। इसके बाद आपको एक पीपीएफ फार्म भरना होगा।




    इस फार्म पर आपको अपने एक उत्तराधिकारी का नाम और उसके हस्ताक्षर चाहिए होंगे। साथी ही आपको इस खाते के लिए एक गवाह की भी दरकार होती है। लेकिन ध्यान रहे आपका उत्तराधिकारी और गवाह दोनों एक ही व्यक्ति नहीं होने चाहिए। इस फॉर्म के साथ आपको अपने पते का प्रमाणपत्र समेत अपनी फोटोग्राफ देनी होंगी। फिर उसके बाद आप जितनी राशि का अपना खाता खोलना चाहते हैं आपको उतनी रकम की एक रसीद भरनी होगी उसका बाद बैंक कर्मी आपको एक पासबुक थमा देगा जिसमें आपके उत्तराधिकारी समेत आपका नाम दर्ज होगा। आप इस तरह के खाते में हर साल कम से कम 500 रुपए और अधिकतम 75 हजार रुपए जमा करा सकते हैं। पीपीएफ में निवेश का महत्व- पहले के दौरान में सरकार कर्मचारियों को एक तय पेंशन दिया करती थीं और इस तरह की प्रैक्टिस कुछ प्राइवेट कंपनियों में भी आम थी, लेकिन अब हमें अपने रिटायमेंट के बाद की व्यवस्था खुद ही करनी होती है। ऐसे में पीपीएफ रिटायरमेंट के लिए एक बेहतर निवेश है। पीपीएफ में पैसा जमा करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें जमा राशि पर 8.7 फीसदी का ब्याज मिलता है और इस राशि पर आयकर कटौती का लाभ मिलता है। साथ ही साथ ऐसे अकाउंट की मैच्योरिटी होने पर जो राशि प्राप्त होती है वो करमुक्त होती है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशों जैसे कि आपके बच्चे की उच्च शिक्षा, बेटी की शादी का खर्च आदि के लिए बेहतर होता है।




    अगर आप पीपीएफ का बेहतर फायदा उठाना चाहते हैं तो आपके लिए बेहतर यह होगा कि आप वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही अपना धन जमा करवा दें। पोस्ट ऑफिस से बैंक में पीपीएफ खाता ट्रांसफर करवाने की सुविधा आमतौर पर लोगों को गलत जानकारी होती है कि पीपीएफ अकाउंट सिर्फ पोस्ट ऑफिस में ही खोला जाता है। यह बैंक में भी खोला जाता है। ऐसे में अगर आपका पीएफ अकाउंट पोस्ट ऑफिस में है तो आप उसे बैंक में भी ट्रांसफर करवा सकते हैं, जानिए कैसे। सबसे पहले आप अपने बैंक से यह जानकारी हासिल करें कि उनकी कौन सी ब्रांच पीपीएफ डिपोजिट लेती है। इसके बाद आप ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह फार्म आपको पोस्ट ऑफिस में जमा कराना होता है और इसमें उस बैंक की तमाम जानकारी नत्थी होती है जहां आप अपना अकाउंट ट्रांसफर करवाना चाहते हैं। साथ ही आपको पोस्ट ऑफिस की मूल पास बुक की कॉपी भी देनी होती है। आवेदन करने के बाद आपका पोस्ट ऑफिस इसकी जांच करता है और फिर आपका खाता बंद कर आपकी तमाम जानकारियां आपके पसंदीदा बैंक को भेज देता है। यह जानकारी बैंक के साथ साथ खाताधारक को भी दी जाती है।



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